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Showing posts from January, 2019

A tale of eyes

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The day has come which he always waited for. Her eyes were twinkling, a suppressed smile, though clearly visible, suggesting that she is aware of what he is about to say. He nervously made a move to come near, the smile widened a bit.. in a trembling voice …. He said “I wanted to say something…. No I mean, I wanted to tell you something….“. She raised her head, looked him in the eyes and said “What  do you want to say? Or tell?... I am listening….
He took a deep breath and continued “I…. the weather is so nice, isn’t it?
That’s what you want to tell?” she asked teasingly..
I don’t know how to put it….. The thing is that…… we have been going to office in same shuttle for last three months…. And I guess ….. I like you..
Yeah, I like you too, we are friends right?” she said
Of course we are friends…. By like you I meant…..
Hey Paarth! Wake up son….. Aren’t you going to office today?” 
He suddenly woke up at the alarm raised by his mom. He realized that it was a dream and he really got …

पराया

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आज इस कदर मैं परेशान नज़र आता हूँ,
औरो से नहीं बनिस्पत खुद से खफा नज़र आता हूँ।
जिन अपनों को माना ज़िन्दगी का सबब,
आज उन् अपनों को मैं पराया नज़र आता हूँ।

जिनं से बेबाक कर लिया करता था हर सोच बया,
बिना शिकवा जो देते थे तवज्जो मुझको।
की ना जाने कौन सी बात अखर जाए उनको,
आज हर अलफ़ाज़ मैं सहमा सा कह पाता हूँ।
जिन अपनों को माना ज़िन्दगी का सबब,
आज उन् अपनों को मैं पराया नज़र आता हूँ।

ऐसा नहीं की मैं बदल गया हु अब,
की आज भी वोह मुझे उतने ही अज़ीज़ है।
पर ना जाने उन्हें क्यों लगता है हर बार,
की मैं अपने नहीं, सुनी सुनाई बातें दोहराता हूँ।
जिन अपनों को माना ज़िन्दगी का सबब,
आज उन् अपनों को मैं पराया नज़र आता हूँ।

की जब तक रहेगा पर्दा यही बेरुखी का,
और होंगी मुलाकातें कुछ यु की रस्मे हो जैसे।
लबो पर मुस्कराहट भले ही क़याम रखने में हो कमियाब,
आँखों की वीरानियों को देखते है कब तक छुपा पाता हूँ।
जिन अपनों को माना ज़िन्दगी का सबब,
आज उन् अपनों को मैं पराया नज़र आता हूँ।